Tuesday, 15 November 2016

प्रेरणादायक कविता - जब हम किसी से

जब हम....



जब हम किसी से पहली बार गर्मजोशी से मिलते हैं तो उसकी नजर में हम हमेशा के लिए एक active और मिलनसार व्यक्ति बन जाते हैं
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जब हम किसी असहाय व्यक्ति की help कर देते हैं तो उस व्यक्ति की नजरों में हम हमेशा के लिए अच्छे बन जाते हैं
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जब हम किसी भूखे बच्चे को खाना खिलाते हैं तो वहां उपस्थित लोगों की नजरों में हम रहमदिल बन जाते हैं।
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जब हम अपने हक के लिए लड़ते हैं तो हमारे समाज की नजरों में हम एक जागरूक व्यक्ति बन जाते हैं
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जब हम किसी को गालियाँ देते हैं तो वहाँ उपस्थित बड़ों की नज़रों में हम असभ्य बन जाते हैं
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जब हम किसी को कुछ आसानी से दे देते हैं तो उसकी नजरों में हम एक मददगार व्यक्ति बन जाते हैं।
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जब हम किसी से; हमेशा अपने मद में रहकर बात करते हैं तो हम घमंडी बन जाते हैं
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और
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जब हम किसी से बहुत प्यार से बात करते हैं तो हम उनकी नजरों में एक दिलदार व्यक्ति बन जाते हैं।
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ये हम ही हैं जो जिस स्थिति में होते हैं तो लोग उसी स्थिति में देखकर हमारे लिए एक दृष्टिकोण decide कर देते हैं कि हम ऐसे हैं...
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जब हम किसी की नजरों में एक बार बुरे बन जाते हैं तो ज़िन्दगी गुजर जाती है कि फिर हम कभी उनकी नजरों में अच्छे बन सकें।
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इसलिए दोस्तों; अपनी life में कभी किसी के साथ ऐसा कार्य ना करो; ऐसी स्थिति बयां ना करो जिससे कि लोगों के मन में आपके प्रति एक नकारात्मक दृष्टिकोण बन जाए।
बाकी तो आप खुद समझदार हो।
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जय हिंद।

Saturday, 12 November 2016

Inspiration line in hindi....we want from world while...

हम दुनियाँ से...


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हम दुनियाँ से सच की उम्मीद रखते हैं जबकि खुद ही मिला-मिला कर झूठ बोलते हैं..!!
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हम दुनियाँ से शांति चाहते हैं जबकि घर पर हमारी कोई चीज खो जाने पर; खुद ही अशांति फैलाते हैं।
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हम दुनियाँ से भ्रष्टाचार का अंत चाहते हैं जबकि पुलिस द्वारा पकड़े जाने पर, उन्हें 100₹ का नोट थमाकर, खुद ही भ्रष्टाचार फैलाते हैं।
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हम दुनियां से हमेशा न्याय चाहते हैं जबकि जहाँ खुद का फायदा दिखता हो, वहाँ दूसरों के साथ अन्याय कर देते हैं।
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हम दुनियाँ से चाहते हैं कि वो हमारे काम में टाँग ना अड़ाए जबकि हम खुद किसी सफल व्यक्ति को आगे नहीं बढ़ने देते।
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हम दुनियाँ से चाहते है सभी प्रेम से रहें जबकि खुद दूसरों की सफलता से ईर्ष्या करते है।
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यही जिंदगी की सच्चाई है मेरे दोस्त, हम दूसरों में बड़ा बदलाव देखना चाहते हैं जबकि खुद नहीं बदलते।
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हर कोई सोचता है कि सामने वाला पहले बदले; जब हर कोई यही सोचेगा तो पहले बदलेगा कौन..???
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ये जिंदगी का एक चक्रव्यूह है दोस्तों, चक्रव्यूह कितना मजबूत है या कमजोर...!!!
इसे तभी जान पाओगे जब खुद इसके अंदर घुस कर जाओगे।
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हम चाहते हैं कि पहले दुनियां बदले लेकिन दुनियां तभी बदलेगी जब हम खुद बदलेंगे।
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जो काम की पहले शुरुआत कर देता है वही उस mission का founder बन जाता है।
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दुनियाँ में भेड़ चाल तो सभी चल रहे हैं लेकिन आओ हम एक शेर बनें और दुनियां को हम अपनी शेर चाल चलाएं फिर हमारी वो चाल एक mission बन जायेगी और हम उसके founder.
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जय हिंद।
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इन्हें भी पढ़ें :- Heart touching poem....दुःख इस बात का नहीं कि..!!!
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Article....एक किसान पिता की दुविधा
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Article....सफलता में बाधा :- ईर्ष्या
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Article....एक कदम आगे

Monday, 7 November 2016

दुख इस बात का नही कि...

दुःख इस बात का नहीं कि....

नोट :- यह poem उन लोगों को ध्यान में रखकर बनाई गई है; जो समझते हैं कि जिंदगी में अब सबने उनका साथ छोड़ दिया है।

दुःख इस बात का नहीं कि तुम नफरत करते हो मुझसे बल्कि दुःख तो इस बात का है कि मैंने अपने अंदर की उस कमी को पहिचाना क्यों नहीं..??
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दुःख इस बात का नहीं कि तुमने धोखा दिया मुझको बल्कि दुःख तो इस बात का है कि मैं अब यकीन करूँगा किसपे..??
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दुःख इस बात का नहीं कि तुम मामूली इंसान समझते हो मुझे बल्कि दुःख तो इस बात का है कि तुम इंसान को मामूली; समझते क्यों हो..??
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दुःख इस बात का नहीं कि तुम हमेशा नजरअंदाज करते हो मुझे बल्कि दुःख तो इस बात का है कि तुमने मुझे ठीक से पहिचाना क्यों नहीं..???
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दुःख इस बात का नहीं कि तुम्हें मेरी सूरत पसंद नहीं बल्कि दुःख तो इस बात का है कि तुम इंसान का व्यवहार देखते क्यों नहीं..??
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दुःख इस बात का नहीं कि अब तुमने बात करना छोड़ दिया मुझसे बल्कि दुःख तो इस बात का है कि आखिर तुमने मुझे वह कारण बताया क्यों नहीं..??
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दुःख इस बात का नहीं तुमने दोस्ती तोड़ दी मेरी बल्कि दुःख तो इस बात का है कि अब मैं इतनी पुरानी दोस्ती करूँगा किससे..??
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यह poem आपको कैसी लगी; कृपया अपने comments के जरिये अवश्य बताइयेगा।
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जय हिंद।
इन्हें भी पढ़ें :-
★जब लगे ठोकर किसी पत्थर से...
★ये जिंदगी है यारो...
★प्रेरणादायक कविता - जब हम किसी से...

Friday, 4 November 2016

How to reduce traffic jam

अगर आप traffic jam से परेशान हैं तो अपनाएं यह तरीका


Traffic jam को कम करने का यह तरीका थोड़ा complicated है लेकिन effective है अगर नीचे दिए गए rules पर थोड़ा गौर किया जाए तो traffic काफी हद तक कम हो सकता है।
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●आज अपने भारत के सभी शहर यातायात अवरोध (traffic jam) की समस्या से जूझ रहे हैं फिर चाहे वो शहर मुम्बई हो या दिल्ली।
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इसीलिए आज इस topic पर बात करना बहुत आवश्यक हो गया है।
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यहाँ Traffic jam से जुड़े तथ्यों को सिर्फ 6 step में समझा जा सकता है और शायद उनसे छुटकारा भी पाया जा सकता है.!!
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☞Step 01. आखिर सड़कों पर traffic jam क्यों हो जाता है??
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☞Step 02. Traffic jam से अधिक परेशानी किन लोगों को होती है।
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☞Step 03. सड़कों पर हो रहे इस traffic jam का जिम्मेदार कौन है..??
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☞Step 04. Traffic jam को कैसे कम किया जा सकता है या इसको कम करने के क्या उपाय हैं??
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☞Step 05. Traffic jam को कम करने के लिए हमें किस वाहन का उपयोग करना चाहिए..??
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☞Step 06. आज traffic jam किन लोगों की बदौलत फिर भी कम है..??

अब इन सभी प्रश्नों के उत्तर हम one by one समझते हैं:-
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☞Step 01. आखिर सड़कों पर traffic jam क्यों हो जाता है??
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मुख्यतः सड़कों पर traffic jam होने का कारण; तेजी से बढ़ती जनसंख्या और वाहन ही हैं, अगर बात दिल्ली की; की जाए तो वहां metro चलने के बावजूद भी किसी और शहर से अधिक traffic है।
जहाँ मेट्रो किसी स्थान पर पहुंचने में 20 मिनट ही लेती है, वहीं बस 45 मिनट से कम नहीं लेती।
यह जो 25 मिनट का फासला है वो किसी speed वगैरह की वजह से नहीं बल्कि traffic के कारण ही है।
Traffic jam होने का कारण; सिर्फ बढ़ती हुई जनसंख्या ही नहीं है बल्कि वो लोग भी हैं जो कहीं अकेले जाते हैं और वो bus या auto से जाने की बजाय अपनी कार ले जाने का कदम उठाते हैं और फिर traffic jam हो जाता है।
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☞ Step 02. Traffic jam से अधिक परेशानी किन लोगों को होती है।
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वैसे traffic jam से परेशानी तो सभी लोगों को ही होती है लेकिन यहाँ सिर्फ परेशानी की नहीं बल्कि अधिक परेशानी की बात की जा रही है तो बता दूं कि Traffic jam से; अधिक परेशानी उन लोगों को होती है जिनके पास समय बहुत कम होता है और जाहिर सी बात है ऐसे लोग उच्चवर्गीय परिवारों से belong करते हैं।
इसीलिए traffic jam से अधिक परेशानी उच्चवर्गीय परिवार (अमीरों) को ही होती है।
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☞ Step 03. सड़कों पर हो रहे इस traffic jam का जिम्मेदार कौन है..??
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वे सभी लोग; जो कहीं अकेले जाते हैं तो bus या auto का use ना करके स्वयं की कार ले जाते हैं।
और traffic jam करवा देते हैं।
इसीलिए traffic jam के जिम्मेदार वो लोग हैं जो अकेले के लिए भी स्वयं की car लेकर निकल पड़ते हैं।
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☞ Step 04. Traffic jam को कैसे कम किया जा सकता है या इसको कम करने के क्या उपाय हैं??
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Traffic jam को कम करने का सबसे आसान जो उपाय है वो यह कि traffic rules को follow किया जाए।
अगर traffic rules को follow करने के बावजूद भी traffic jam कम होने में कोई बदलाव नहीं दिखता है तो ये एक serious problem है।
खैर, traffic jam को reduce करने का मैंने जो तरीका खोजा है शायद वो आप पहले से जानते हों लेकिन मानते ना हों।
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तरीका :- 
1. अकेले कहीं जाने के लिए कभी कार का उपयोग ना करें क्योंकि चार ऐसे लोग; जो खुद की कार लेकर सड़कों पर निकल पड़ते हैं फिर सडकों पर 4 कार दौड़ रहीं होती हैं और प्रत्येक कार में सिर्फ एक-एक व्यक्ति ही होता है जबकि वही चार लोग अगर अपनी-अपनी कार से जाने की बजाय एक auto से जाएँ तो सड़क पर एक कार की जगह एक auto लेगा और बाकी तीन कारों की जगह रिक्त हो जायेगी।
और इस तरह traffic jam तीन गुना तक कम हो जायेगा।
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2. आप कितने भी अमीर क्यों ना हों..??
अगर traffic jam कम कराने का हौंसला रखते हो तो जब कभी भी कहीं अकेले जाना हो तो कार (4-wheeler) का use ना करें बल्कि bus, auto या public transport का ही use करें।
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और हाँ; अगर आप auto का use करते हैं तो पैसे के दम पर कभी उसे अकेले के लिए book ना करें क्योंकि auto में चार लोगों के बैठने की पर्याप्त जगह होती है और ऐसे में अगर आप अकेले के लिए ऑटो book कर लेते हैं तो बाकी के तीन लोगों को दूसरी auto से जाना पड़ेगा और फिर वही traffic jam की समस्या आ खड़ी होगी।
आपको traffic को कम करवाना है ना कि auto book करके; comfort होकर traffic को बढ़ावा देना है।
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☞ Step 05. Traffic jam को कम करने के लिए हमें किस वाहन का उपयोग करना चाहिए..??
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कुछ उच्चवर्गीय लोग auto, bus या metro से जाने में अपनी तौहीन समझते हैं।
वो समझते हैं कि जब मेरे पास खुद का वाहन है तो bus वगैरह से क्यों जाएँ??
सही बात है; अगर आपको Traffic jam से कोई problem नहीं आती तो आप ख़ुशी-खुशी अपने वाहन से ही जा सकते हैं लेकिन अगर आपको traffic jam; एक serious problem लगती है और इससे मुक्ति पाना भी चाहते हैं तो आपको अकेले के लिए कार ना ले जाकर metro या bus से ही जाना होगा; बाकी reason तो आप जान ही चुके हैं कि क्यों जाना होगा..???
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☞ Step 06. आज traffic jam किन लोगों की बदौलत फिर भी कम है..??
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कुछ लोगों के पास समय बहुत कम होता है और traffic jam लगने पर बस या ऑटो वालों को दोषी ठहराते हैं; जबकि खुद car में अकेले बैठे रहते हैं और traffic jam का कारण बनते हैं।
अगर शहर में bus या auto चलाने पर प्रतिबन्ध लगा दिया जाए तो प्रत्येक व्यक्ति स्वयं का वाहन खरीदने की जद्दोजहद में लग जाएगा।
फिर एक समय ऐसा आएगा कि सभी के पास वाहन तो पर्याप्त होंगे लेकिन उन्हें चलाने के लिए सड़कें नहीं होगीं।
इसीलिए आज ऑटो या बस चलाने वालों का शुक्रिया अदा करो क्योंकि इन लोगों के दम पर ही आज सड़कें फिर भी फ्री हैं वरना सड़कों पर traffic इतना अधिक हो जाता कि जो footpath; लोगों के पैदल चलने के लिए बनाये जाते हैं उन पर फिर बाइक या साईकल दौड़ने लगती और फिर सड़कों पर पैदल चलने के लिए तो क्या पैर रखने के लिए भी जगह नहीं मिलती।
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So friends, my humble request please follow these guidelines.
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और हाँ, शुरुआत भी खुद से ही करनी पड़ती है बाकी तो आप खुद ही समझदार हो।
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Thankyou
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तो friends ये थे traffic jam को समझने और उनसे उबरने के 6 Steps.
Traffic jam से मुक्ति पाने का ये तरीका आपको कैसा लगा; कृपया अपने comments के जरिये हमें बताइये ताकि हम ऐसे और भी article लिखने की कोशिश करें।
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जय हिंद।

Wednesday, 26 October 2016

माँ के लिए वास्तविक और दिखावटी प्रेम

माँ के लिए वास्तविक और दिखावटी प्रेम


कुछ वर्ष पहले बहुत खुश थी वो माँ; जो अपने बच्चों को लोरियां सुनाकर सुला देती थी।
बहुत खुश था वो बच्चा जिसे माँ की लोरियाँ किसी टॉफ़ी से अधिक प्यारी लगती थीं।
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समय गुजरता गया; बच्चा बड़ा होता गया और माँ की लोरियों की जगह television ने ले ली।
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अब वही बच्चा शाम को माँ की लोरियों की जगह; television पर cartoons को देखते-देखते सोने लगा।
अब शायद वो बच्चा माँ की वही लोरियाँ बार-बार सुनकर थक गया था; शायद इसीलिए उसने लोरियों की जगह cartoons को दे दी।
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खैर; समय और गुजरा; बच्चा और भी बड़ा होता गया और फिर television की जगह smartphone ने ले ली।
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अब वही बच्चा शाम को tv पर cartoons की जगह; पिता से मोबाइल लेकर games खेल-खेलकर सोने लगा।
अब शायद वो बच्चा tv पर cartoons देख-देखकर bore हो गया था ; शायद इसीलिए उसने cartoons की जगह games को दे दी।
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खैर; समय और गुजरा और वो बच्चा; अब बच्चा नहीं रहा बल्कि एक बालिग बन गया था और उसके पास खुद का एक smartphone आ गया था।
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फिर उस बच्चे का संपर्क games की दुनियाँ से भी टूटकर; internet से जुड़ा।
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और जब संपर्क internet से जुड़ गया है तो भला social media से कैसे अछूता रहा जा सकता है।
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Social media (facebook+whatsapp) पर उसने अपना account बना लिया और धीरे धीरे वो अपनी माँ से दूर होता गया और उसकी आँखे नए नए लोगों को ढूंढने लगीं।
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उसकी माँ बार-बार उसे खाना खाने के लिए कहती और वो; "बस माँ दो मिनट" कहकर आधा घंटा निकाल देता।
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जो माँ पहले लोरियाँ सुनाकर बहुत खुश होती थी; अब वही माँ ये सोचकर दुःख रहती है कि मेरा बेटा मोबाइल पर आखिर ऐसा क्या करता है जो उसे खाना खाने के लिए भी इन्तजार करना पड़ता है।
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माँ कभी-कभी उससे कहती भी थी कि कुछ और भी कर लिया कर, इस तरह मोबाइल का कीड़ा बनना अच्छी बात नहीं।
लेकिन उस पर माँ की बातों का असर होता ही नहीं था, वो माँ की बातों को एक कान से सुनकर दूसरे से निकाल देता था और फिर से अपने कामों (facebook और whatsapp) में busy हो जाता।
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वैसे real में वह माँ के लिए समय भले ही ना निकाल पा रहा हो लेकिन facebook और whatsapp पर माँ के लिए उतना ही बढ़ गया था।
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फिर वो social media पर regular ही माँ के ऊपर बनी post को पढ़ने लगा, like करने लगा और तो और; comments में i love my mom भी लिखने लगा था।
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सच कहें तो वो सिर्फ लिखता ही था, social मीडिया पर जितना प्यार वो माँ के लिए दिखा रहा था ना...!!
reality में अगर वो उसका 50% ही प्यार माँ को देता....तो उसकी माँ के लिए उसका बेटा "मोबाइल का कीड़ा" ना बनता।
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खैर; क्या आप जानते हैं कि ये किस लड़के की कहानी है।
ये किसी और लड़के की नहीं बल्कि मैं सोचता हूँ कि ये हमारी और तुम्हारी ही कहानी है।
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जो अपना अधिकतर समय facebook और whatsapp पर ही बिताते हैं और वहाँ माँ के ऊपर बनी post पर i love my mom का comment भी चिपका देते हैं।
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अरे भाई...facebook पर तो i love my Mom का वो भी comment कर देगा; जो घर पर अपनी माँ से प्यार ना करता हो।
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शायद आज हर माँ के लिए उसका बेटा मोबाइल का कीड़ा बन गया है।
इसीलिए मेरा मानना है कि मोबाइल चलाओ;  लेकिन उतना ही कि आप अपनी माँ की नजरों में उनके बेटे ही रह सको; ना कि एक मोबाइल के कीड़े😏😏..!!!
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So friends, मेरे कहने का मतलब यही है:_
"वास्तविक प्रेम वह नहीं है जो हम माँ के प्रति online (facebook+whatsapp पर) बयाँ करते हैं।"
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"वास्तविक प्रेम तो वो है जब हम offline; माँ के साथ बैठकर उन्हें अपना वास्तविक समय देते हैं।"
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इसलिए जब फुर्सत हुआ करे तब माँ के साथ बैठ लिया करो यारो..!!!
क्या पता कल को हमारे इस तरह online रहने से माँ हमसे रूठ जाये और हम facebook पर फिजूल ही दिखावटी प्रेम और i love my mom के comments करते रहें।
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इस blog में मैंने बहुत सारी कड़वी लेकिन सच्ची बातें लिखी हैं अगर फिर भी किसी की भावनाओं को हमारे शब्दों से चोट पहुँची हो तो मैं माफी मांगता हूं।
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कृपया अपने comments द्वारा बताइये कि ये blog आपको कैसा लगा..???
हो सकता है कि मैंने अपने blog में कुछ गलतियाँ की हों क्योंकि मैं अभी एक नया blogger हूँ।
इसीलिए आपका फर्ज बनता है कि उन गलतियों को अपने comments के जरिये बताएं।
और मुझे; और भी article लिखने के लिए प्रोत्साहित करें।
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जय हिंद।

Sunday, 23 October 2016

एक किसान पिता की दुविधा😥

किसान पिता की दुविधा...

काफी पढ़ा लिखा होने के बावजूद भी जब उसे अपने ओहदे ही नौकरी नहीं मिली तो वह घर पर ही अपना समय बिताने लगा...!!!
कहीं वो अपने दोस्तों के साथ घूमने चला जाता तो कहीं वो घर पर ही आराम से लेटकर सो जाता।
इसी तरह चल रही थी उसकी जिंदगी।
जबकि उसके पिता एक किसान थे।
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उसे इस तरह जिंदगी जीते देखकर उसके पिता से रहा न गया और उसे एक दिन समझाते हुए बोले कि बेटा इस तरह घर पर रहना कोई अच्छी बात नहीं है।
आपको अगर कोई पढ़ी लिखी नौकरी नहीं मिल रही है तो क्या..!!!
तब तक आप मेरे साथ मेरे काम में हाथ बँटा सकते हो!!!
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बेटे को यह सुनकर ही गुस्सा आ गया और झल्लाते हुए बोला :- आपने इसीलिए पढ़ाया था मुझे..??
ताकि मैं भी आपकी तरह खेती कर सकूँ..??
मैं काफी पढ़ा लिखा हूँ ; अब आप ही बताइए कि मुझे इस तरह खेती-बाड़ी करना शोभा देगा क्या..???
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अनपढ़ पिता, बेटे की ऐसी बातें सुनकर कोई जवाब न दे सका और वहां से चलता बना।
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लेकिन किसान पिता के मन में एक ही दुविधा रहती थी कि मेरा लड़का आखिर इतना पढ़ा लिखा होने के बावजूद भी मेरी भावनाओं को क्यों नहीं समझता है; वो ऐसा क्यों समझता है कि मैं भी उसे एक किसान बनाना चाहता हूँ।
अगर ऐसा होता तो मैं उसे पढ़ाता ही क्यों..???
मैं तो सिर्फ उसे इतना समझाना चाह रहा था कि जब तक उसे उसकी मनपसंद की नौकरी नहीं मिल जाती तब तक वह मेरे साथ; मेरे काम में हाथ बँटाये लेकिन वो तो मेरी बात को हमेशा गलत ले जाता है आखिर यह कब समझेगा मेरी भावनाओं को..??
ऐसा सोचते-सोचते पिता की आँखे आंसुओं से नम हो गईं।
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अचानक ही रास्ते में पिता को उनके मित्र टकरा गए; जब पिता ने उन्हें देखा तो झट से अपने आंसू पोंछ लिए ..!!!
लेकिन इन आंसुओं को पोंछते हुए उनके मित्र ने देख लिया था।
और बोले कि यार..!!! ये आंसू क्यों बहा रहे थे???
पिता (बनने का नाटक करते हुए) :- आंसू...!!! नहीं तो..!!!
मित्र :- देखो..!!! जो है उसे सच सच बता दो कुछ छुपाओ मत...समझे!!!
इस पर पिता ने सब बातें अपने मित्र को बता देना ही उचित समझा।
और अपने बेटे की सारी कहानी कह सुनाई।
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ये सब सुनकर उनके मित्र भी काफी भावुक हो गए; और उन्होंने कहा :- तुम चिंता मत करो ; आपके बेटे को मैं समझा दूंगा।
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दूसरे दिन वो मित्र ; अपने मित्र (पिता) के घर पहुंचे।
वहां पर वो लड़का उस वक़्त खाना खा रहा था।
खाना खाने के बाद लड़के ने उनके पैर छुए और बोला कि अंकल!! आज कैसे आना हुआ..???
कोई खाश बात???
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अंकल(मित्र) :- कुछ नहीं!!! बस इधर से निकल रहा था कि सोचा कि आपके हाल -चाल पूछता चलूँ!!! और क्या कर रहे हो आजकल???
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लड़का :- कुछ कर ही तो नहीं रहा..!!! बस किसी नौकरी की तलाश में ही हूँ।
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अंकल :- अरे जब तक नौकरी नहीं मिलती तब तक आप कुछ और काम कर लो..!!!
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लड़का :- कुछ और काम..!!! जैसे कि..???
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अंकल :- जैसे कि आप अपने पिता के साथ खेती में उनका हाथ बँटा सकते हो या फिर मेरे साथ कपड़ों की बिक्री करवा सकते हो!!!
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लड़का (खिशियाहट भरी मुस्कान के साथ) :- अंकल इतना पढ़ा लिखा हूँ और आप मुझे ये कैसा काम करने के लिए कह रहे हो??
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अंकल :- बेटा मैं जिंदगी भर ये काम करने के लिए थोड़े ही कह रहा मैं सिर्फ तब तक कह रहा हूँ जब तक कि आपको अपनी मनपसंद की नौकरी नहीं मिल जाती।
और वैसे भी आप घर पर रहकर क्या करते होंगें...??
या तो फिजूल घूमते होंगे या फिर सोते होंगे..???
इससे तो अच्छा है कि आप कुछ सीखो भले ही वो काम अनपढ़ वाला ही क्यों ना हो।
क्योंकि आज जो काम आपके पिता और हम कर सकते हैं वो आप नहीं..??
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लड़के को उनकी बात जँच गई और वह दूसरे ही दिन पिता के साथ उनका हाथ बँटाने को तैयार हो गया।
ये सब देखकर पिता की आँखे खुशी से दमक उठीं थीं इसलिए नहीं कि अब उनका बेटा उनके साथ खेती करेगा बल्कि इसलिए कि अब उनका बेटा उनकी भावनाओं को समझ गया था।
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Friends, अक्सर ऐसा हम भी करते हैं, जब हम अधिक पढ़ लिख जाते हैं और कोई अच्छी नौकरी नहीं मिलती तो घर पर फिजूल ही पिता की कमाई की रोटियां तोड़ते रहते हैं जबकि हमको करना ये चाहिए कि अगर हमें कोई मनपसंद job नहीं मिल रही है तो तब तक वो job करनी चाहिए जो हमें मिल रही है।
ना ना ना..!! जिंदगी भर नहीं.....सिर्फ तब तक; जब तक कि हमें हमारी मनपसंद job नहीं मिल जाती।
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अगर आपको यह blog पसंद आया हो तो comment करना ना भूलें।
शायद आपको नहीं पता कि एक blogger को आपका positive comment कितनी ख़ुशी देता है।
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जय हिंद।

इन्हें भी पढ़ें :-
1.मेरे सुधरने से क्या; दुनियाँ सुधर जाएगी...!!
2.एक माँ की परेशानी...
3.जरा सोचें - एक अनकही कहानी
4.जरा सोचें...!!! क्यों हम अच्छी बातों को follow नहीं कर पाते..??

Sunday, 16 October 2016

One step ahead

एक कदम आगे...

कौटिल्य को आज कौन नहीं जानता..???
एक ऐसा बच्चा जिसे आज देश-दुनियाँ के सभी नाम याद हैं और computer जैसा दिमाग है।
Atleast एक छोटा बच्चा और इतना active कैसे हो सकता है..??
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ये सवाल हर किसी के जेहन में आता है..??
और आना भी चाहिए क्योंकि ऐसा सुनना और देखना हमें असंभव सा लगता है; कुदरत का करिश्मा लगता है!!!
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Budhiya singh born to run : a movie
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अगर आपने ये movie नहीं देखी तो मैं कहना चाहूँगा कि पहले आप इस movie को देखिये और उसके बाद मेरा blog पढ़िए..!!! क्योंकि ये blog भी मैंने उसी movie से inspire होकर बनाया है।
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movie देखने or download करने के लिए यहाँ क्लिक करें।
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इस movie के name पर मत जाइये क्योंकि ये movie इसके name से बहुत अच्छी है!!!
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ये बात मैंने इसलिए बोली क्योंकि अधिकतर लोग movie के name से ही decide कर लेते हैं कि कौन सी movie देखनी चाहिए और कौन सी नहीं..!!! जो कि सरासर गलत है।
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हम किसी भी movie को देखने से पहले; ये भी decide कर लेते हैं कि अगर movie किसी famous actor; like as - सलमान खान, शाहरुख़ खान की हुई तो अच्छी otherwise बेकार।
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कभी कभी famous actor के अभाव में हम एक बहुत ही अच्छी movie (story) देखने से वंचित रह जाते हैं...!!!
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यही वजह है कि हम बुधिया सिंह जैसी movies को ignore कर देते हैं क्योंकि इस movie का ना तो name ही कुछ खाश है और ना ही इसमें कोई खाश actor है।
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but i think; ये movie आपको देखनी चाहिए क्योंकि ये सिर्फ एक movie नहीं है बल्कि ये एक सच्ची घटना पर आधारित फिल्म है और इसमें किसी के talent को बड़ी ही अच्छी तरह से दिखाया गया है!!
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जी हाँ, एक बच्चे बुधिया सिंह का talent...!!!
बुधिया सिंह मात्र 5 वर्ष का है और वह बिना रुके, बिना पानी पिए 65km तक मैराथन कर लेता है...!!!
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अगर बुधिया सिंह का coach (मनोज वाजपेयी) उसे एक बच्चा समझकर दौड़ने के लिए मना कर देता तो हमें उसके talent का कभी पता ही नहीं चलता कि कोई बच्चा non-stop 65km तक भी दौड़ सकता है।
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खैर, ऐसे तमाम उदाहरण हैं जिनमें छोटे उस्तादों ने ही बड़ा काम कर दिखाया है और दुनियाँ में अपनी एक नई पहचान कायम की है।
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कभी-कभी हम बच्चों के बारे में कहते हैं कि अभी तो वो बहुत छोटा है, उम्र के साथ सब सीख जाएगा...!!
ठीक इसी जगह हम गलती कर बैठते हैं और बच्चों को बचपन में ही उनके talent से रूबरू नहीं करवाते..!!!
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अगर किसी बच्चे में बचपन से ही कुछ सीखने की ललक है तो उस ललक को हमें उस बच्चे की उम्र पर नहीं छोड़ देना चाहिए कि अभी तो बहुत time है सब सीख जाएगा बल्कि उसे उसी समय उसकी ताकत से रूबरू करवाना चाहिए, उसका हौंसला बढ़ाना चाहिए और छोटी उम्र में ही उसे बड़ा उस्ताद बना देना चाहिए..!!!
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बच्चा ही क्यों..???
अगर आप भी सोचते हैं कि अभी तो काफी समय पड़ा है फिर कर लेंगें..!!!
तो यही आपकी गलत सोच है; क्योंकि आज की प्रतियोगी दुनियाँ में समय ही तो नहीं है..!!!
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अगर आप सोचते हैं कि मैं तो अपनी उम्र के हिसाब से पर्याप्त जानता हूँ तो ये सोच भी ठीक नहीं है..!!
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क्योंकि ठीक ऐसा ही अगर असुरों के गुरू शुक्राचार्य भी सोच लेते तो शायद वो सिर्फ 6 वर्ष की उम्र में ही अपने गुरू से अधिक शिक्षा प्राप्त नहीं कर पाते।
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अगर एक छोटा बच्चा आपको कोई suggestion देता है तो आपको उसके suggestion को भी ध्यानपूर्वक सुनना चाहिए क्योंकि हो सकता है कि उसे भी छोटी उम्र में ही शुक्राचार्य जितना ज्ञान प्राप्त हो गया हो..!!!
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friends, मेरे कहने का मतलब यही है कि अगर आप चाहते हैं कि आप अपनी छोटी उम्र में ही अपने senior को मात दे दें तो आपको उम्र का इंतजार नहीं करना चाहिए बल्कि जितना हो सके उतना सीखने की कोशिश करते रहना चाहिए;
क्योंकि...
"उम्र के साथ तो हर कोई सीखता है लेकिन जो उम्र से पहले सीखे वही महान होता है।"
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I think, इसका moral लिखने की मुझे जरुरत नहीं है क्योंकि आप समझ ही गए होंगे कि इस छोटे से blog में कितने moral छिपे हुए हैं...!!!
जरुरत है तो सिर्फ इन moral पर अमल करने की।
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अगर आपको यह post अच्छी लगी हो तो कृपया share या comment करना ना भूलें क्योंकि आपका एक comment हमें और भी blog लिखने के लिए प्रेरित करेगा।
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जय हिन्द।